24/03/2026
रिपोर्ट : वरुण वैध
केन्दुआ बाजार में पूज्य श्री सुरेन्द्र हरिदास जी महाराज के सानिध्य में श्रीमद्भागवत कथा का षष्ठम दिवस सोमवार को कथा में पूर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल जी शामिल होकर व्यासपीठ से आशीर्वाद प्राप्त कर कथा का श्रवण किया.साथ ही उन्होंने कथा पंडाल में भक्तों का मार्गदर्शन किया.मनुष्य का जीवन उसके संग के अनुसार ढलता है.जिस प्रकार सुगंधित फूलों के पास बैठने से हमारे वस्त्रों में भी खुशबू आ जाती है, उसी प्रकार सच्चे और सद्गुणी लोगों के संग से हमारे विचार, व्यवहार और संस्कार पवित्र हो जाते हैं.उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि ईमानदारी, करुणा और धैर्य ही सच्ची सफलता की कुंजी हैं।इसलिए जीवन में मित्र और मार्गदर्शक चुनते समय सावधानी आवश्यक है.सच्चे लोगों का संग हमें कठिन समय में सही मार्ग दिखाता है, हमारी गलतियों को सुधारता है और हमें लक्ष्य की ओर प्रेरित करता है।पूतना भगवान श्रीकृष्ण को मारने के उद्देश्य से अपने स्तनों पर कालकूट विष लगाकर उन्हें दूध पिलाने के लिए आती है, किंतु भगवान ने उसका भी उद्धार कर दिया.यह दर्शाता है कि भगवान केवल अपराध नहीं देखते, बल्कि भाव को देखते हैं.जो उन्हें विष पिलाने के लिए आया, यदि उसका भी उद्धार कर सकते है तो तुम्हारा क्यों नहीं कर सकते है. जब मानव अहंकार और स्वार्थ छोड़कर भगवान की शरण में जाते हैं, तो वे अवश्य हमारा उद्धार करते हैं, हमारे पापों का नाश करते हैं और हमें जीवन के दुखों से मुक्त कर मोक्ष की ओर ले जाते हैं.ब्रजभूमि कोई साधारण धरती नहीं, बल्कि यह दिव्यता, प्रेम और भक्ति की जीवंत धरोहर है.यह वही पावन भूमि है जहाँ स्वयं कृष्ण जी ने बाल लीलाएँ कीं, गोचारण किया, माखन चुराया और गोप-गोपियों के साथ रास रचाया। ब्रज की रज-रज में श्रीकृष्ण की लीलाओं की स्मृतियाँ बसी हुई हैं, इसलिए यहाँ की धूल भी भक्तों के लिए वंदनीय मानी जाती है.ब्रज भूमि पर कदम रखना केवल यात्रा नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभूति है — जहाँ मन निर्मल होता है, हृदय प्रेम से भर जाता है और आत्मा भगवान के और निकट पहुँच जाती है.इस संसार में यदि कोई प्रेम निःस्वार्थ, निष्कलंक और अनंत है, तो वह माँ का प्रेम है.माँ अपने बच्चे को जन्म देने से लेकर उसके पालन-पोषण, शिक्षा, संस्कार और हर सुख-दुख में अपना सर्वस्व अर्पित कर देती है. वह स्वयं कष्ट सहकर भी अपने बच्चों को मुस्कान देती है. माँ का ऋण जीवनभर चुकाया नहीं जा सकता.चाहे संतान कितनी भी बड़ी उपलब्धि क्यों न प्राप्त कर ले, माँ के त्याग और तपस्या के सामने वह सब छोटा ही होता है.माँ रातों की नींद त्यागकर, अपनी इच्छाएँ छोड़कर, अपने बच्चों के सपनों को पूरा करने में लगी रहती है.मनुष्य के जीवन में जो भी सुख और दुख आते हैं, उनका मूल कारण उसके अपने कर्म ही होते हैं.प्रकृति का यह अटल नियम है कि जैसा बीज बोया जाता है, वैसा ही फल प्राप्त होता है.यदि हम अच्छे, पवित्र और परोपकारी कर्म करते हैं तो उसका परिणाम भी सुख, शांति और सम्मान के रूप में मिलता है. वहीं यदि हम बुरे, स्वार्थपूर्ण या अधार्मिक कर्म करते हैं तो उनका फल दुख, अशांति और पछतावे के रूप में सामने आता है.जब मानव अपने अहंकार, भय और संशय को त्यागकर पूर्ण विश्वास के साथ प्रभु के चरणों में समर्पित हो जाता है, तब उसकी रक्षा का भार स्वयं भगवान उठा लेते हैं.जब भगवान ने विभीषण, द्रौपदी और प्रह्लाद की रक्षा की, तो वे आपकी और हमारी रक्षा क्यों नहीं करेंगे? आवश्यकता केवल इतनी है कि हम दिखावे की नहीं, बल्कि सच्चे मन, पूर्ण समर्पण और दृढ़ विश्वास के साथ उनकी शरण में जाए.इस कथा को सफल करने में सुधीर ठाकुर,मनोज रवानी दुलारी, संंजय ताम्रकार रेणु देवी, सुजीत ठाकुर पुनम देवी,अमित ठाकुर सोनाली देवी,दीपक ताम्रकार गुड़िया देवी,सोनू कुमार रेखा देवी ,गंगा प्रसाद गुप्ता, राजेश ताम्रकार,सुनिल कुमार शर्मा,सुजल कुमार,विनोद ताम्रकार,निखिल चौरसिया,अमित ताम्रकार,आदित्य गुप्ता,विक्रात रवानी,आलौक ताम्रकार चन्दन पौदार धीरज साव,आदि समस्त केन्दुआ बाजार नगर वासियों के सहयोग से किया जा रहा है।
कल दिनांक 25 /03/2026 दिन बुधवार को महारास रूक्मणी कृष्ण बहुत धुमधाम से मनाया जाएगा.