10/01/2026
अलीगढ़ : शिक्षा, संस्कृति और बौद्धिक विमर्श को नई दिशा देने वाली राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन सत्र 10 जनवरी को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के आर्ट संकाय आयोजित किया गया। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता कला संकाय के संकायाध्यक्ष (डीन) प्रो. टी.एन. शतीशन ने की।मुख्यातिथि प्रो नईमा खातून उपकुलपति अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी विशिष्ट अतिथि प्रो मोहम्मद मोहसिन खान सहायक उप कुलपति अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी कार्यक्रम की शुरुआत पंजीयन के साथ हुई, जिसके पश्चात औपचारिक उद्घाटन सत्र संपन्न हुआ।उद्घाटन अवसर पर स्वागत भाषण देते हुए प्रो. शमीम अख्तर ने अतिथियों का अभिनंदन किया और संगोष्ठी के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि सामाजिक चेतना और मूल्यबोध का सशक्त माध्यम बन चुकी है। सतत शिक्षा को ओर बेहतर कैसे बनाये, सत्र में नई शिक्षा नीति और साक्षरता विषय पर भारत ज्ञान विज्ञान समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सह राष्ट्रीय कॉर्डिनेटर सतत् शिक्षा डॉ. काशीनाथ चटर्जी ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत में साक्षरता आंदोलन की शुरुआत वर्ष 1990 में हुई थी ,जिसने समाज में गहरा और दूरगामी प्रभाव डाला।उस समय देश के लगभग 15 करोड़ असाक्षर लोग साक्षरता केंद्रों से जुड़े और लगभग डेढ़ करोड़ उन्हें पढ़ाने का कार्य किया ।राष्ट्रीय साक्षरता मिशन और भारत ज्ञान विज्ञान समिति ने इस अभियान को जन आंदोलन का रूप दिया। इसके साथ ही कहा कि नई शिक्षा नीति को समावेशी,रोजगारोन्मुखी और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी बताते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर बल दिया।मुख्य उद्घाटन वक्तव्य अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की उप कुलपति प्रो .नईमा खातून द्वारा दिया गया।उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन नहीं, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी है।इसके पश्चात सह कुलपति एवं रजिस्ट्रार ने भी संबोधित करते हुए शैक्षणिक शोध और संवाद की आवश्यकता को रेखांकित किया।इस अवसर पर अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क महासचिव एवं भारत ज्ञान विज्ञान समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आशा मिश्रा ने भी अपने विचार साझा किए। भारत ज्ञान विज्ञान समिति के महासचिव डॉ. ओ.पी. भुरेटा सत्र के अंत में अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. टी.एन. शतीशन ने कहा कि इस प्रकार के अकादमिक आयोजन समाज और शिक्षा जगत के बीच सेतु का कार्य करते हैं।उद्घाटन कार्यक्रम में शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।यह कार्यशाला दो दिन चलेगा जिसमें देश के 8 राज्य जिसमें मध्यप्रदेश,उत्तर प्रदेश,हिमाचल प्रदेश,बिहार,झारखंड,ओडिशा,
उत्तराखंड,हरियाणा,दिल्ली लगभग 40 प्रतिभागी शामिल हुए हैं।